हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, लेबनान का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा उसकी संप्रभुता, सहमति आधारित राजनीतिक व्यवस्था और इस्लामी–ईसाई साझेदारी है, जिसे वह बाहरी हस्तक्षेप और विशेषकर ज़ायोनी योजनाओं के विरुद्ध मानते हैं। वे कहते हैं कि लेबनान की वर्तमान ताकत “प्रतिरोध” और जनता की एकता में निहित है, जो देश की रक्षा और पहचान का आधार है।
उन्होने कहा कि सेना और प्रतिरोध के बीच सहयोग राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूती के लिए आवश्यक है, जबकि बाहरी शक्तियों के दबाव में लिए गए निर्णय देश को कमजोर करते हैं। शेक क़बलान अमेरिका और इज़राइल पर लेबनान की राजनीति को प्रभावित करने का आरोप लगाते हैं और ईरान को लेबनान की संप्रभुता का समर्थक मानते हैं। साथ ही वे यह भी कहते हैं कि लेबनान को किसी एक पक्ष (ईरान या सऊदी अरब) के खिलाफ नहीं खड़ा किया जाना चाहिए।
शेख अहमद क़बलान क्षेत्रीय राजनीति में प्रतिरोध की भूमिका को निर्णायक बताते हुए दावा करते हैं कि इज़राइल कमजोर हो रहा है और नया क्षेत्रीय संतुलन बन रहा है। अंत में वे इमाम हुसैन (अ) को प्रेरणा का स्रोत बताते हैं और कहते हैं कि जिस व्यक्ति के पास इमाम हुसैन (अ) हैं, वह कभी हार को नहीं जानता।
आपकी टिप्पणी